किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसकी पहली शर्त ,जिद्दी होना पड़ता है,
दूसरी शर्त,उसका निरंतर समर्पण भाव से प्रयासरत होना होता है
तीसरी शर्त,उसे सोते जागते बाथरूम से बेडरूम तक उसे अपने जेहन में मथते रहना होता है,हो सकता है वो आपको सोने न दे,
पर सपने वैसे ही देखने चाहिए जो आपको सोने न दे,
फिर आप जो चाहेंगे वो आपको मिलेगा,
ये शुद्ध रूप से मेरा सुविचार है,मानो या ना मानो, अभी तक जो भी हासिल हुआ है,इन्ही शर्तो के साथ ईश्वर की कृपा से हुआ है,और आगे भी होगा
चाहे लक्ष्य व्यक्तिगत हो या सामाजिक हो या राष्ट्रीय होl

