गोरखपुर ,19 मार्च, 2025। ‘महन्त दिग्विजयनाथ विद्यार्थी वित्तपोषण योजना – 2025’ के अन्तर्गत छात्र कल्याण समिति के द्वारा महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को ‘आर्थिक सहायता’ प्रदान करने हेतु साक्षात्कार का आयोजन किया गया।
आर्थिक सहायता हेतु महाविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के कुल 523 विद्यार्थियों को उनके द्वारा किये गए आवेदन के आधार पर आमन्त्रित किया गया था, जिसमें से कुल 443 विद्यार्थी उपस्थित रहे l
साक्षात्कार के लिए कुल छः मानक – अभिवावक / परिवार की
वार्षिक आय, शैक्षिक योग्यता, पाठ्य सहगामी क्रियाओं में सहभागिता, कक्षा में उपस्थिति, अभिभावक पर आश्रितता तथा दिव्यांगता निर्धारित किए गए थे।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि साक्षात्कार तथा अभिलेखों के सत्यापन के आधार पर कुल 202 विद्यार्थियों (101 अनुदानित पाठ्यक्रम से तथा 101 स्ववित्तपोषित पाठयक्रम से) का चयन किया जाएगा l चयनित विद्यार्थियों के बैंक खातों में 31 मार्च तक उनकी सहायता धनराशि (रुपया एक हज़ार मात्र/-) महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र द्वारा भेज दिया जायेगा। महाविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों के साथ मजबूती से खड़ा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं । यथासंभव उनके शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। छात्र कल्याण समिति के समन्वयक डॉ. सुभाष चन्द्र ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि महाविद्यालय में फ्री इण्टरनेट, जिम, योग, ताइक्वाण्डो, हॉस्टल तथा विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति की सुविधा उपलब्ध है। साक्षात्कार के अन्त में उन्होंने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले समस्त विद्यार्थियों, साक्षात्कारकर्ताओं, छात्र कल्याण समिति के सदस्यों, उपस्थित प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को साक्षात्कार के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित भी किया।
उक्त कार्यक्रम के सफल संपादन में महाविद्यालय के प्राध्यापक – प्रो. परीक्षित सिंह, प्रो. नित्यानंद श्रीवास्तव, प्रो. अर्चना सिंह, प्रो. शुभ्रा श्रीवास्तव, डॉ. आर.पी. यादव, डॉ. अनिल भास्कर, डॉ. सुरेन्द्र चौहान, श्री अवधेश कुमार शुक्ल, श्रीमती निधि राय, डॉ. प्रतिमा सिंह, श्री धर्मचंद विश्वकर्मा, डॉ. अनीता कुमारी, श्री रविन्द्र नाथ, श्री हिमांशु यादव, डॉ. श्याम सिंह, डॉ. शिव कुमार, डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. विभा सिंह, डॉ. शुभ्रान्शु शेखर सिंह, डॉ. कुलदीप पाण्डेय, डॉ. नितेश शुक्ला, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. संजीव सिंह, डॉ. संजय त्रिपाठी, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. पवन पाण्डेय, डॉ. सूरज शुक्ला तथा अन्य प्राध्यापकों ने सक्रिय योगदान दिया ।