गोरखपुर। 15 अगस्त 2026 को 80 वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ झंडारोहण कर मदरसा नूरिया खरिया, गोरखपुर में मनाया गया, उक्त अवसर पर बच्चो द्वारा सदभावना गीत सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ । उक्त अवसर पर झंडारोहण के उपरांत स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम नौजवानों एवं मुस्लिम छात्रो की भूमिका विषयक […]
गोरखपुर। 15 अगस्त 2026 को 80 वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ झंडारोहण कर मदरसा नूरिया खरिया, गोरखपुर में मनाया गया, उक्त अवसर पर बच्चो द्वारा सदभावना गीत सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ ।
उक्त अवसर पर झंडारोहण के उपरांत स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम नौजवानों एवं मुस्लिम छात्रो की भूमिका विषयक संगोष्ठी का आयोजन मदरसा नूरिया खरिया में आयोजित किया गया और भारत के स्वंत्रता में मुस्लिम छात्रो और नौजवानों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अपने संबोधन में सैयद इज़हार अहमद , प्रबंधक ,मदरसा नूरिया खरिया, बगाहीभरी, गोरखपुर ने मदरसा की छात्रो को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम नौजवानों और छात्रों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़कर, आंदोलनों का नेतृत्व करके और अपनी जान की बाज़ी लगाकर देश को आज़ाद कराने में योगदान दिया। यहाँ उनके मुख्य योगदानों की पूरी जानकारी दी गई है:प्रमुख छात्र संगठन और आंदोलन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU): यह विश्वविद्यालय स्वतंत्रता आंदोलन का एक बड़ा केंद्र था। यहाँ के छात्रों ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना: राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं और छात्रों ने ब्रिटिश सरकार से सहायता प्राप्त संस्थानों का बहिष्कार किया। इसके बाद 1920 में अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना हुई, जो बाद में दिल्ली स्थानांतरित हो गई। इसके छात्र पूरी तरह आज़ादी की लड़ाई में समर्पित थे।ऑल इंडिया मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (AIMSF): इस संगठन के युवा और छात्र देश की राजनीतिक गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय रहे।प्रमुख युवा और छात्र नेताअशफ़ाक उल्लाह ख़ान: काकोरी कांड (1925) के मुख्य नायक रहे अशफ़ाक उल्लाह ख़ान केवल 27 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हो गए। उनकी देशभक्ति ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया।मौलाना अबुल कलाम आज़ाद: उन्होंने बहुत कम उम्र (लगभग 24 वर्ष) में ‘अल-हिलाल’ समाचार पत्र शुरू किया। इसके माध्यम से उन्होंने युवा मुस्लिमों को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एकजुट किया।डॉ. जाकिर हुसैन: एक युवा छात्र नेता के रूप में उन्होंने असहयोग आंदोलन का समर्थन किया और जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई।हसरत मोहानी: इन्होंने ही सबसे पहले युवाओं के बीच “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा दिया था, जो बाद में भगत सिंह और हर क्रांतिकारी की आवाज़ बना।आंदोलनों में सक्रिय भागीदारीअसहयोग और खिलाफत आंदोलन (1920-1922): हजारों मुस्लिम छात्रों ने सरकारी स्कूल और कॉलेजों का बहिष्कार किया। वे जेल गए और लाठियां खाईं।भारत छोड़ो आंदोलन (1942): इस आंदोलन में मुस्लिम युवाओं ने भूमिगत (underground) रहकर काम किया। उन्होंने ब्रिटिश सरकार की संचार व्यवस्था को ठप करने और क्रांतिकारियों तक संदेश पहुँचाने का काम किया।रेशमी रूमाल आंदोलन (Silk Letter Movement): मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी और अन्य युवा देवबंदी विद्वानों ने अंग्रेजों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए गुप्त संदेश भेजने की यह मुहिम चलाई थी।मुस्लिम नौजवानों और छात्रों का यह संघर्ष इस बात का गवाह है कि भारत की आज़ादी किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के साझा बलिदान का परिणाम थी।