अलीगढ़ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
‘जय भीम’ के नारे लगवाने का आरोप… FIR के बाद थाने का घेराव, सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन
अलीगढ़ में करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव से मारपीट का मामला अब सड़क से थाने तक पहुंच गया है।
🔴 पहले सड़क पर मारपीट, फिर थाने का घेराव
अलीगढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में क्षत्रिय युवा करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।
वीडियो में सचिन राघव को भीड़ के बीच घिरा हुआ और उनके साथ मारपीट होती दिखाई देती है। रिपोर्टों में उनके साथ माफी मंगवाने और ‘जय भीम’ के नारे लगवाने की बात भी सामने आई है।
🔴 ‘जय भीम’ का नारा लगाने से इनकार पर मारपीट का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सचिन राघव को कथित तौर पर जबरन ‘जय भीम’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया।
आरोप है कि नारा लगाने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें खींचते हुए अंबेडकर पार्क की तरफ ले जाया गया।
वायरल वीडियो में उनसे माफी मंगवाने और नारे लगवाने का दृश्य होने की रिपोर्ट है। इन आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर होनी है।
🔴 FIR हुई तो अब थाने के बाहर दूसरा प्रदर्शन
पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और आरोपियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की।
इसके बाद गुरुवार को वाल्मीकि समाज से जुड़े लोगों और सफाई कर्मचारियों ने सिविल लाइन थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दूसरे पक्ष के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाए और पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए युवकों को छोड़ा जाए। इस विरोध के दौरान सफाई व्यवस्था भी प्रभावित होने की खबर है।
🔴 थाने के बाहर खड़ी रहीं कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कूड़ा उठाने वाले वाहनों को भी थाने के बाहर खड़ा किया गया और सफाई कर्मचारियों के काम प्रभावित होने की बात सामने आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और स्थिति पर नजर रखी।
⚠️ अब मामला सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा
एक तरफ आरोप है कि सचिन राघव ने समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
दूसरी तरफ आरोप है कि उस टिप्पणी के विरोध में उन्हें भीड़ ने घेरकर पीटा, जबरन नारे लगवाए और माफी मांगने के लिए मजबूर किया।
और अब FIR के बाद दूसरा पक्ष भी थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहा है।
❓सबसे बड़ा सवाल—कानून किसके लिए?
अगर किसी व्यक्ति पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है तो शिकायत, जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन अगर किसी व्यक्ति को भीड़ पकड़ती है, पीटती है और कथित तौर पर जबरन नारा लगवाती है, तो उस पर भी कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
नारा ‘जय भीम’ हो या कोई दूसरा—किसी व्यक्ति को जबरन नारा लगवाने के लिए हिंसा का सहारा लेने का सवाल गंभीर है।
🔴 अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की जांच।




