ज्योतिष डेस्क ,निष्पक्ष टुडे:-
.पं0 अंकित शुक्ल ( गर्गाचार्य )
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दिनाँक:-24/12/2025,बुधवार
पौष , शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, पंचक प्रारंभ सायं 05:55 pm
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तिथि —– चतुर्थी 10:53 am + पंचमी
पक्ष: ———‐————– शुक्ल
नक्षत्र ———— धनिष्ठा 18:10:35
योग -‐———— हर्षण 15:03:05
करण ——– विष्टि भद्र 13:10:34
करण————— बव 25:29:57
वार————————- बुधवार
माह————————— पौष
चन्द्र राशि ——— मकर 19:45:31
चन्द्र राशि ——————- कुम्भ
सूर्य राशि ‐——————– धनु
ऋतु ————————शिशिर
आयन ——————– उत्तरायण
संवत्सर ———-‐——- कालयुक्त
विक्रम संवत् ————— 2082
शक संवत् —————- 1947
कलि संवत् ————— 5126
काशी
सूर्योदय——–‐——- 06:47:15
सूर्यास्त—————– 17:13:37
दिन काल————– 10:21:22
रात्री काल————– 13:39:03
चंद्रोदय—————– 10:12:42
चंद्रास्त—————– 21:25:58
लग्न—- धनु 8°16′ , 248°16′
सूर्य नक्षत्र——————— मूल
चन्द्र नक्षत्र—————— धनिष्ठा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र
*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*
गा—- धनिष्ठा 13:26:58
गी—- धनिष्ठा 19:45:31
गु—-धनिष्ठा 26:02:25
*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
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सूर्य= धनु 08°16 , मूल 3 भा
चन्द्र= धनु 23°30 , धनिष्ठा 1 गा
बुध = वृश्चिक 22°52 ‘ ज्येष्ठा 2 या
शु क्र= धनु 05°05, मूल , 2 यो
मंगल= धनु 12°30 ‘ मूल. 4 भी
गुरु= कर्क 28°50 पुनर्वसु, 3 हा
शनि=मीन 01°13 ‘ पूo भा o , 4 दी
राहू=(व) कुम्भ 18°25 शतभिषा, 4 सू
केतु= (व) सिंह 18°25 पूoफाo 2 टा
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*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*
राहू काल 12:19 – 13:37 अशुभ
यम घंटा 08:26 – 09:44 अशुभ
गुली काल 11:01 – 12:19 अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:40 अशुभ
दूर मुहूर्त 11:58 – 12:40 अशुभ
वर्ज्यम 11:20 – 13:02 अशुभ
प्रदोष 17:30 – 20:16. शुभ
🚩पंचक 19:46 – अहोरात्र अशुभ
💮चोघडिया, दिन
लाभ 07:08 – 08:26 शुभ
अमृत 08:26 – 09:44 शुभ
काल 09:44 11:01 अशुभ
शुभ 11:01 12:19 शुभ
रोग 12:19 – 13:37 अशुभ
उद्वेग 13:37 – 14:54 अशुभ
चर 14:54 16:12 शुभ
लाभ 16:12 17:30 शुभ
🚩चोघडिया, रात
उद्वेग 17:30 – 19:12 अशुभ
शुभ 19:12 – 20:54 शुभ
अमृत 20:54 – 22:37 शुभ
चर 22:37 – 24:19* शुभ
रोग 24:19* – 26:02* अशुभ
काल 26:02* – 27:44* अशुभ
लाभ 27:44* – 29:26* शुभ
उद्वेग 29:26* – 31:09* अशुभ
💮होरा, दिन
बुध 07:08 -08:00
चन्द्र 08:00- 08:52
शनि 08:52- 09:44
बृहस्पति 09:44 -10:35
मंगल 10:35 -11:27
सूर्य 11:27 -14:02
चन्द्र 14:02- 14:54
शनि 14:54- 15:46
बृहस्पति 15:46 -16:38
मंगल 16:38- 17:30
🚩होरा, रात
सूर्य 17:30- 18:38
शुक्र 18:38- 19:46
बुध 19:46- 20:54
चन्द्र 20:54 -22:03
शनि 22:03- 23:11
बृहस्पति 23:11- 24:19
मंगल 24:19-25:27
सूर्य 25:27-26:36
शुक्र 26:36-27:44
बुध 27:44-28:52
चन्द्र 28:52-30:00
शनि 30:00-31:09
*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*
धनु > 06:36 से 08:38 तक
मकर > 08:38 से 10:18 तक
कुम्भ > 10:18 से 11:58 तक
मीन > 11:58 से 13:22 तक
मेष > 13:22 से 14:58 तक
वृषभ > 14:58 से 16:52 तक
मिथुन > 16:52 से 19:22 तक
कर्क > 19:22 से 21:32 तक
सिंह > 21:32 से 11:38 तक
कन्या > 11:38 से 02:08 तक
तुला > 02:08 से 04:10 तक
वृश्चिक > 04:10 से 06:34 तक
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*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान————- उत्तर*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
4 + 4 + 1 = 9 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
बुध ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
4 + 4 + 5 = 13 ÷ 7 = 6 शेष
क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक






