गोरखपुर ब्यूरो , निष्पक्ष टुडे
रवि किशन के तंज के बाद अखिलेश यादव से मिले विश्वजीत त्रिपाठी, सपा के साथ काम करने की घोषणा
गोरखपुर। गोरखपुर में भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात और सपा के पक्ष में काम करने के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। 16 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों के बाद 17 अक्टूबर की रिपोर्टों में उनके भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने सांसद रवि किशन के पुराने तंज—“सपा के नेता हो गइला का?”—को फिर चर्चा में ला दिया है। जिस सवाल को उस समय राजनीतिक कटाक्ष माना गया था, वही अब दल-बदल की खबरों के बीच सियासी संकेत की तरह देखा जा रहा है।
“सपा के नेता हो गइला का?”: जलभराव से शुरू हुई बात, सियासी बदलाव तक पहुंची
भारी बारिश के बाद बेतियाहाता वार्ड :-
जलभराव की समस्या को लेकर पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने रवि किशन से फोन पर बात की थी। वायरल बातचीत में सांसद ने उनसे पूछा था कि क्या वह सपा में शामिल हो गए हैं। त्रिपाठी ने जवाब दिया था कि जलभराव की समस्या उठाने का मतलब सपा में शामिल होना नहीं है।
अब अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद वही बातचीत नए राजनीतिक संदर्भ में देखी जा रही है। 
पहले सपा से जुड़े रहे और सपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने भाजपा में कार्यकर्ताओं के सम्मान, संगठन और स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल उठाए हैं। सहजनवां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावित इच्छा की चर्चा भी है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रवि किशन का सवाल बना सियासी आईना, लेकिन जलभराव का जवाब अब भी बाकी
दल-बदल और राजनीतिक बयानबाजी के बीच गोरखपुर के नागरिकों की प्राथमिक चिंता अब भी जलभराव और जलनिकासी की समस्या है।






