इतिहास खुद को दोहराता है; बस फर्क इतना है कि स्थान, समय एवं परिप्रेक्ष्य बदल जाते है। हाल में वैश्विक स्तर पर हो रहे जेन-जी आंदोलनों एवं वर्ष 2010 के उत्तरार्द्ध में हुए अरब स्प्रिंग आन्दोलन के मध्य साम्यता से यह बात और भी सटीक ढंग से समझी जा सकती है। जहाँ अरब स्प्रिंग की […]
इतिहास खुद को दोहराता है; बस फर्क इतना है कि स्थान, समय एवं परिप्रेक्ष्य बदल जाते है। हाल में वैश्विक स्तर पर हो रहे जेन-जी आंदोलनों एवं वर्ष 2010 के उत्तरार्द्ध में हुए अरब स्प्रिंग आन्दोलन के मध्य साम्यता से यह बात और भी सटीक ढंग से समझी जा सकती है।
जहाँ अरब स्प्रिंग की शुरुआत ट्यूनीशिया में दिसम्बर 2010 के महीने में एक युवा मोहम्मद बाकी बोआजीची की सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एक प्रशासनिक अत्याचारों के कारण मृत्यु से शुरू हुई और यह विस्तारित होते हुए मिस, लिबिया, सिरिया, बहरीन एवं यमन जैसे देशों तक फैल गयी।
तो वहीं, जेन जी आंदोलन जो कमोबेश भारत के पड़ोसी बांग्लादेश से शुरु हो कर पाकिस्तान, नेपाल और अब अफ्रीकी देश मोरक्को, मेडागास्कर लैटिन अमेरिका देश पेरू तक फैल चुका है, इसके मूल में भी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, प्रशासनिक एवं राजनीतिक उदासीनता को फौरी तौर पर उत्तरदायी माना जा रहा है।
इन दोनों आंदोलनों के मूल में मूलतः युवाओं का बढ़ता हुआ असंतोष जो समाजिक असमानता, बढ़ते विभेद, बेरोजगारी, राजनीतिक भ्रष्टाचार उत्तरदायित्व निर्धारण की कमी, नेपोटिज्म, गुड गवर्नेस की कमी इत्यादि रहे हैं। दोनों आंदोलनों का नेतृत्व युवा वर्ग के द्वारा किया गया। जहाँ जेन जी आंदोलनों से बांग्लादेश, नेपाल, मेडागास्कर आदि में सत्ता परिवर्तन हुए तो वहीं पाकिस्तान, पेरु जैसे देशों में इनका प्रभाव सीमित रहा। ऐसे ही अरब स्प्रिंग ने ट्यूनीशिया, मिस्र, लिबिया एवं यमन में सत्ता परिवर्तन किया परंतु अन्य कई राष्ट्रों में इसका प्रभाव भी सीमित रहा।
डिजिटल क्रांति का प्रभाव भी इन दोनों क्रांतियों में महत्वपूर्ण रहा है। जहाँ अरब स्प्रिंग के दौरान लोगों ने फेसवुक, ट्विटर जैसे प्लेटफार्म का प्रयोग सूचना पहुंचाने, संगठित होने एवं अग्रिम कार्य योजना बनाने के लिए किया, जिसके कारण इसे डिजिटल युग का प्रथम जन आंदोलन की संज्ञा दी गयी। वहीं जेन जी जो सच्चे अर्थों में आज डिजिटल युग के युवा हैं, इन्होंनें भी टिक टाक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे सोशल मिडिया प्लेटफार्मों का उपयोग किया। सरकारी तंत्र की सेंसरशिप एवं सर्विलांस से बचने लिए उन्होंनें VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का प्रयोग किय। इस सन्दर्भ में जेन जी आन्दोलन अरब स्प्रिंग से ज्यादा डिजिटली एडवांस था।
परंतु इन सब के बावजूद दोनों आंदोलनों में कुछ मूलभूत अंतर रहे हैं जहाँ अरब स्प्रिंग मूलतः अधिनायकवाद, राजतंत्र, सैन्य शासन के विरुद्ध एक क्षेत्रीय आंदोलन था, जिसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन कर लोकतंत्र की स्थापना करना था, तो वहीं, जेन जी का स्वरूप अपेक्षाकृत ज्यादा वैश्विक रहा है। इन में अधिकांश राष्ट्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था होते हुए भी यह इनकी कमियों के विरुद्ध आंदोलन था। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदलना न होकर इस व्यवस्था में व्याप्त खामियों को समाप्त करना है।
जहाँ अरब स्प्रिंग में अलोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध वहाँ के विरोधी गुट तथा संस्थाओं का योगदान महत्वपूर्ण था तो वहीं जेन जी आंदोलन का स्वरूप डायनामिक है। यह अत्यधिक विकेंद्रीकृत, नेतृत्वविहिन एवं फेसलेस आन्दोलन है, जिसको किसी स्वरुप में बांधा नहीं जा सकता और यहीं इस आंदोलन की विशेषता है।