पीपीगंज। भव्य एवं पारंपरिक वेश में शनिवार को नगर पंचायत पीपीगंज के तिघरा में श्री मद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। अयोध्या के महान संत धरणी धर जी महाराज के नेतृत्व में यजमान एन डी त्रिपाठी के आवास पर कथा आयोजन स्थल से पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के साथ शुरू […]
पीपीगंज। भव्य एवं पारंपरिक वेश में शनिवार को नगर पंचायत पीपीगंज के तिघरा में श्री मद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ।
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अयोध्या के महान संत धरणी धर जी महाराज के नेतृत्व में यजमान एन डी त्रिपाठी के आवास पर कथा आयोजन स्थल से पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला पुरुष बच्चे श्रद्धालु शामिल रहीं। यह कलश यात्रा आयोजन स्थल से शुरू हो कर दुर्गा मंदिर,हनुमान मन्दिर, काली मंदिर होते हुये पितेश्वरनाथ शिव मंदिर के सरोवर से पवित्र जलस्त्रोत कलश को भर कर लाने के बाद कथा आयोजन स्थल पर धार्मिक विधि एवं मंत्रोच्चरण के साथ स्थापित किया गया। आरती के साथ शुरू किए गए श्रीमद् भागवत कथा में संत धरणीधर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया।उन्होंने बताया कि विश्व में सभी कथाओं में ये श्रेष्ठ मानी गई है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है, वो तीर्थ स्थल कहलाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियां को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। अगर कोई सात तक किसी व्यवस्तता के कारण नहीं सुन सकता है, तो वह दो तीन या चार दिन ही इसे सुनने के लिए अपना समय अवश्य निकालें। तब भी वो इसका फल प्राप्त करता है, क्योंकि ये कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है, जिसमें उनके अवतार से लेकर कंस वध का प्रसंग का उल्लेख होने के साथ साथ इसकी व्यक्ति के जीवन में महत्ता के बारे में भी बताया गया है। इसके सुनने के प्रभाव से मनुष्य बुराई त्याग कर धर्म के रास्ते पर चलने के साथ साथ मोक्ष को प्राप्त करता है।
शास्त्री ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुना था, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्य़ु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था।
कलश यात्रा में मुख्य रूप से प्रमुख यजमान डॉ0एन डी त्रिपाठी,अवनींद्र त्रिपाठी रिंकू,टिंकू त्रिपाठी,श्लेश्वर त्रिपाठी,शनि त्रिपाठी,बंटू त्रिपाठी,इंद्रजीत मिश्रा, सभाषद राघवेन्द्र सिंह मंटू, सत्यनरायन सिंह,आशुतोष सिंह,हरिराम मिश्रा, संतोष पाठक,ईश्वर चन्द्र मौर्या, रन्धा सहानी,हरिनारायण यादव समेत अन्य लोग मौजूद थे।