नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-
9 पन्नों का बयान… 33 बिंदु… और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल!
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मंदिर निर्माण से लेकर उसकी व्यवस्था तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का विस्तृत बयान जारी किया है।
इस बयान में 33 बिंदुओं के जरिए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
लेकिन सवाल है—
आखिर चंपत राय ने ऐसा क्या कहा, जिससे राम मंदिर निर्माण के फैसलों को लेकर नई बहस छिड़ गई?

🔴 पहला बड़ा सवाल — बड़े फैसलों की कमान किसके हाथ में थी?
चंपत राय के बयान के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका बेहद प्रभावशाली रही।
राय का दावा है कि—
निर्माण एजेंसी के चयन से लेकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और दूसरे निर्माण कार्यों तक कई महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की पसंद को प्राथमिकता दी गई।
यानी सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं…
सवाल फैसले लेने की प्रक्रिया का भी है।
🔴 L&T और TCE का चयन — कैसे हुआ फैसला?
चंपत राय के मुताबिक,
राम मंदिर निर्माण के लिए L&T यानी लार्सन एंड टुब्रो को चुना गया।
वहीं,
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर TCE यानी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का चयन किया गया।
चंपत राय के बयान में इन फैसलों के संदर्भ में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका का विशेष उल्लेख किया गया है।
🔴 वास्तुकार को लेकर चंपत राय ने क्या स्पष्ट किया?
यहां चंपत राय ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण तथ्य रखा है।
उनके मुताबिक—
राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा का चयन वर्ष 1986 में स्वर्गीय अशोक सिंघल ने किया था।
इसका मतलब यह है कि मुख्य मंदिर के वास्तुकार के चयन को लेकर राय ने नृपेंद्र मिश्रा को जिम्मेदार नहीं बताया।
हालांकि, उनके बयान के मुताबिक अन्य भवनों के डिजाइन से जुड़ी फर्म के चयन में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका रही।









