हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से स्वामी आत्मबोधानंद की शिष्टाचार भेंट एवं चरित्र निर्माण और विश्व कल्याण पर चर्चा…। आज हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मा. शिवप्रताप शुक्ल जी से महाप्रभु स्वामी रामनाथ परमहंस पीठ के पीठ धिश्वर और विश्व ज्योतिषी एकता अध्यात्म संस्थान के अध्यक्ष स्वामी आत्मबोधानंद जी ने शिष्टाचार भेट के बाद लगभग […]
हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से स्वामी आत्मबोधानंद की शिष्टाचार भेंट एवं चरित्र निर्माण और विश्व कल्याण पर चर्चा…।
आज हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मा. शिवप्रताप शुक्ल जी से महाप्रभु स्वामी रामनाथ परमहंस पीठ के पीठ धिश्वर और विश्व ज्योतिषी एकता अध्यात्म संस्थान के अध्यक्ष स्वामी आत्मबोधानंद जी ने शिष्टाचार भेट के बाद लगभग 45 मिनट तक नई पीढी के चरित्र निर्माण से लेकर राष्ट्र पुनरुत्थन एवं विश्व कल्याण और विश्व शांति पर गंभीर दृष्टि बोधक चर्चा किया।
विज्ञापन (ADVERTISEMENT)विज्ञापन (In-Article Banner - Fluid)
Direct / AdSense Ad Slot
प्रोफेसर शीला मिश्रा के साथ संयुक्त रूप से लिखी हुई अपनी नाट्य कृति ‘विलक्षण विवेकानंद’ भेट किया जिसका अवलोकन करने के बाद स्वामी रामकृष्ण परमहंस की अध्यात्मिक उच्चता और स्वामी विवेकानंद जी के व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र राष्ट्र पुनरुत्थन की मूल सोच पर भी चर्चा हुई।
नॉर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय, अमेरिका में प्रोफेसर रहीं, लखनऊ विश्ववद्यालय के साइंस फैकल्टी की डीन तथा विवेकानन्द केंद्र, कन्याकुमारी की उत्तर प्रदेश प्रान्त की प्रमुख डॉ शीला मिश्रा से महामहिम राज्यपाल जी ने दूरभाष पर विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों पर भी चर्चा की। अमेरिका, कनाडा, पुर्तगाल, श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड आदि देशों में प्रोफेसर शीला मिश्र द्वारा भारतीय संस्कृति, दर्शन, योग तथा सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर दिए गए उद्बोधन पर भी महामहिम ने उनसे चर्चा की।
स्वामी जी द्वारा महामहिम राज्यपाल जी से स्वामी रामनाथ परमहंस धाम, औनाहा, कानपुर देहात की विश्व कल्याण और विश्व शांति संबंधी गतिविधियों की चर्चा की गई तथा अवगत कराया गया कि गुरु आज्ञा के क्रम में उनके द्वारा ग्रीस, श्रीलंका, थाईलैंड तथा नेपाल में आत्मबोध संबंधी व्याख्यान दिए गए हैं और आत्मबोध यज्ञ कराया गया है। आत्मबोध यज्ञ के चार सोपान के बारे में स्वामी जी ने महामहिम जी को अवगत कराया-
1. प्रबोधन से चरित्र निर्माण से सोच निर्माण और विश्व कल्याण
2. शिव और शक्ति मंत्रों से नवग्रहों की लकड़ियों और औषधीय हवन सामग्री से विश्व कल्याण और विश्व शांति की कामना
3. ज्योतिषीय परामर्श से अशुभता का निवारण और शुभता का संवर्धन
4. लोक प्रस्तुति से आत्म गौरव का विकास साहित्य पर चर्चा करते हुए महामहिम राज्यपाल जी ने अपने कालेज और विश्वविद्यालय के दिनों में लिखी गई कविताओं का जिक्र किया।
महामहिम राज्यपाल जी ने जोर देकर कहा कि चिंतन से चरित्र और चरित्र से संस्कृति और सभ्यता का जन्म और विकास होता है। जिस समाज का, देश का जैसा चिंतन होता है, वैसा ही उसका चरित्र बनता है, वैसी ही संस्कृति बनती है और वैसी ही सभ्यता विकसित होती है…।
उन्होंने स्वामी जी के विचारों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि जिसे आत्मबोध है, वहीं चरित्र निर्माण का कार्य कर सकता है, उसे आप ऋषि कहिए, गुरु कहिए, आचार्य कहिए, व्यास कहिए, मनीषी कहिए या कवि कहिए या कुछ और नाम दीजिए…।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रधानमंत्री मा. श्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच कि युवाओं को जागृत कर 2045 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना और उसे विश्व नेतृत्व के लिए तैयार करना, ऐसे ही साकार किया जा सकता है।
स्वामी जी के साथ इस शिष्टाचार भेंट में ज्योतिषाचार्य डॉ पंकज त्रिपाठी ‘प्रेमानंद’, योगाचार्य मनीष देवयुग तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री गोविंदानंद सम्मिलित हुए।
स्वामी जी ने कहा कि श्री सतीश त्रिपाठी जी का आतिथ्य और व्यवहार उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने महामहिम जी के प्रति इस सार्थक चर्चा के लिए अपना कीमती वक़्त देने के लिए आभार व्यक्त किया।