चिल्लूपार में सियासी घमासान बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप जर्जर सड़कें और बदहाल व्यवस्था युवाओं का पलायन बेलगाम सरकारी तंत्र 2027 के लिए ठोंकी ताल,”बदलेंगे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति” अस्मिता चंद का चिल्लूपार के लिए रोडमैप राजनीतिक मायने गोला, गोरखपुर।चिल्लूपार(328) विधानसभा में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो […]
चिल्लूपार में सियासी घमासान
बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
जर्जर सड़कें और बदहाल व्यवस्था
युवाओं का पलायन
बेलगाम सरकारी तंत्र
2027 के लिए ठोंकी ताल,”बदलेंगे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति”
अस्मिता चंद का चिल्लूपार के लिए रोडमैप
राजनीतिक मायने
गोला, गोरखपुर।चिल्लूपार(328) विधानसभा में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। हाल ही में राम मंदिर मुद्दे को लेकर वर्तमान भाजपा विधायक राजेश त्रिपाठी द्वारा पूर्व विधायक पर लगाए गए आरोपों के बाद अब इस विवाद में भाजपा नेत्री अस्मिता चंद की भी एंट्री हो गई है।
अस्मिता चंद ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर वर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी और विपक्षी धड़े, दोनों की राजनीति पर तीखा प्रहार किया है।
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चिल्लूपार में सियासी घमासान,,
भाजपा विधायक राजेश त्रिपाठी पर भाजपा नेत्री अस्मिता चंद का बड़ा हमला, कहा- नकारात्मक राजनीति से क्षेत्र का नुकसान हुआ है।
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। राम मंदिर के मुद्दे पर शुरू हुआ बयानबाजी का दौर अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में चिल्लूपार के वर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी द्वारा पूर्व विधायक पर पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दिए गए बयान पर अब भारतीय जनता पार्टी की ही नेत्री अस्मिता चंद ने करारा पलटवार किया है। अस्मिता चंद ने राजेश त्रिपाठी पर सीधा निशाना साधते हुए इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ करार दिया है। नूराकुश्ती से जनता को कुछ नहीं मिला।
अस्मिता चंद ने क्षेत्र की जनता को संबोधित करते हुए एक बेहद आक्रामक और भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा कि राजनीति का मूल उद्देश्य जनसेवा और विकास होता है, लेकिन चिल्लूपार में लंबे समय से जिम्मेदारी संभालने वाले चेहरे आज अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं।
विधायक राजेश त्रिपाठी और पूर्व विधायक के बीच चल रही इस जुबानी जंग को ‘नूराकुश्ती बताते हुए अस्मिता ने सवाल उठाया।
अस्मिता चंद ने पोस्ट में पूछा, मैं पूछना चाहती हूँ कि इस आपसी लड़ाई से हमारे चिल्लूपार की जनता को क्या मिला? सच तो यह है कि इस नकारात्मक राजनीति से केवल और केवल आम जनमानस और समूचे चिल्लूपार का नुकसान हुआ है।”
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बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
भाजपा नेत्री ने क्षेत्र की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि किसी अन्य व्यक्ति की गलती या उसका पुराना भ्रष्टाचार, वर्तमान जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता को नहीं छिपा सकता। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा।
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जर्जर सड़कें और बदहाल व्यवस्था:
आज भी क्षेत्र की सड़कें बदहाल हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
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युवाओं का पलायन:
क्षेत्र का युवा रोजगार के लिए लगातार पलायन करने को मजबूर है।
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बेलगाम सरकारी तंत्र:
जब बड़े चेहरे आपसी जंग और व्यक्तिगत आरोपों में उलझ जाते हैं, तो जनता के बुनियादी मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और सरकारी तंत्र बेलगाम हो जाता है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जनता ने नेताओं को एक-दूसरे के पापों और भ्रष्टाचार की सूची पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए चुना था।
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2027 के लिए ठोंकी ताल: “बदलेंगे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति”
इस पूरे विवाद के बीच अस्मिता चंद ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी अपनी दावेदारी और संकल्प को साफ कर दिया है। उन्होंने चिल्लूपार की जनता से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि वे इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को हमेशा के लिए बदलने और क्षेत्र को एक स्वच्छ, ईमानदार और सकारात्मक विकल्प देने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।
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अस्मिता चंद का चिल्लूपार के लिए रोडमैप:
सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार का पूरी तरह खात्मा करना,
माताओं-बहनों को सुरक्षा और सम्मान दिलाना,हर गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना और विकास की एक बड़ी लकीर खींचना।
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राजनीतिक मायने:
चिल्लूपार में वर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी के खिलाफ अपनी ही पार्टी के भीतर से उठ रहे ये सुर आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राम मंदिर मुद्दे से शुरू हुई यह बहस अब स्थानीय विकास, भ्रष्टाचार और भाजपा के अंदर ही अपने नेताओं के आरोपों के इर्द-गिर्द घूम गई है, जिससे आने वाले दिनों में चिल्लूपार की राजनीति और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।