गोरखपुर। AIIMS गोरखपुर का ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग जटिल ट्रॉमा सर्जरी के लिए एक उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। हाल ही में, ट्रॉमा टीम ने ट्रॉमेटिक स्पाइनल इंजरी और ट्रॉमेटिक एस्टेटबलम इंजरी के मरीजों के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। टीम ने इन जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक […]
गोरखपुर। AIIMS गोरखपुर का ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग जटिल ट्रॉमा सर्जरी के लिए एक उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। हाल ही में, ट्रॉमा टीम ने ट्रॉमेटिक स्पाइनल इंजरी और ट्रॉमेटिक एस्टेटबलम इंजरी के मरीजों के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। टीम ने इन जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 10 स्पाइनल इंजरी और 10 एस्टेटबलम फ्रैक्चर मामलों में शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त की है।
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AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) प्रो. विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा, “AIIMS गोरखपुर का ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग उच्चस्तरीय उपचार प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। जटिल ट्रॉमा सर्जरी में मिली यह सफलता टीम की दक्षता और संस्थान की उत्कृष्टता को दर्शाती है। यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे मरीजों को अब बेहतरीन इलाज अपने ही शहर में उपलब्ध हो सकेगा।”
जटिल एस्टेटबलम फ्रैक्चर सर्जरी में विशेषज्ञता
एस्टेटबलम (hip socket) का फ्रैक्चर एक अत्यंत जटिल स्थिति होती है, जिसका उपचार विशेष विशेषज्ञता की मांग करता है। AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा टीम ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इसे एक नए स्तर पर पहुंचाया है। **स्त्रोपा एप्रोच**, जिसमें सर्जरी पेट के रास्ते की जाती है, के माध्यम से सफल सर्जरी करके AIIMS गोरखपुर ने इस क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यह एक जटिल लेकिन प्रभावी तकनीक है, जिसका मुख्य उद्देश्य कम से कम नुकसान के साथ हड्डी को पुनर्स्थापित करना और जोड़ की संरचना को संरक्षित रखना होता है।
एस्टेटबलम, यानी वह स्थान जहां जांघ की हड्डी (फीमर) और कूल्हे की हड्डी (पेल्विस) आपस में जुड़ती हैं, जब टूट जाता है तो इसे एस्टेटबलम फ्रैक्चर कहते हैं। यह फ्रैक्चर अक्सर भारी दुर्घटनाओं, गिरने या उच्च ऊर्जा वाले ट्रॉमा के कारण होता है। चूंकि यह शरीर का एक गहरा भाग होता है, इसलिए इसके ऑपरेशन के लिए विशेष तकनीक और सावधानी की आवश्यकता होती है।
इससे पहले, इस तरह के जटिल मामलों को उपचार के लिए लखनऊ या वाराणसी भेजना पड़ता था, लेकिन अब AIIMS गोरखपुर में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को न केवल बेहतरीन इलाज मिल रहा है, बल्कि उनकी यात्रा से जुड़ी कठिनाइयां और वित्तीय बोझ भी कम हुआ है।
ट्रॉमेटिक स्पाइनल इंजरी सर्जरी में सफलता
स्पाइनल इंजरी के मामलों में त्वरित सर्जरी मरीजों की रिकवरी को बहुत अधिक प्रभावित करती है। AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा टीम ने एक विशेष प्रोटोकॉल विकसित किया है, जिसके तहत स्पाइनल इंजरी वाले मरीजों को प्राथमिकता देते हुए तेजी से ऑपरेशन किया जाता है। अब तक 10 जटिल स्पाइनल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं, जिससे मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सका और उनकी रिकवरी की संभावनाएं कई गुना बढ़ गईं।
AIIMS गोरखपुर: ट्रॉमा केयर में एक नई पहचान
AIIMS गोरखपुर का ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जटिल सर्जरी की ये सफलताएं न केवल इस संस्थान की विशेषज्ञता को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब ट्रॉमा मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज के लिए अन्य शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा टीम इस क्षेत्र में अपनी सेवाओं को और विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में और अधिक मरीजों को जीवनरक्षक उपचार मिल सकेगा।