विमान दुर्घटना पर बहुत से ज्योतिषीय समीकरण की चर्चा हो रही है। हाल में ही 171 नं० की फ्लाइट नंबर भविष्य में न लिखने की घोषणा विमान कंपनी ने की है और ’11 A’ टिकट यात्री के बचने की दूसरी घटना ये हुई है। इससे पहले भी हुई एक विमान दुर्घटना में 1 ही यात्री […]
विमान दुर्घटना पर बहुत से ज्योतिषीय समीकरण की चर्चा हो रही है। हाल में ही 171 नं० की फ्लाइट नंबर भविष्य में न लिखने की घोषणा विमान कंपनी ने की है और ’11 A’ टिकट यात्री के बचने की दूसरी घटना ये हुई है। इससे पहले भी हुई एक विमान दुर्घटना में 1 ही यात्री बचा था। उसका भी सीट नं० ’11 A’ था और भूतपूर्व मुख्यमंत्री का जो लकी नं० था, वहीं दिन उनकी मृत्यु का भी हुआ।
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यूनिवर्स की कोई भी घटना अकारण नहीं होती और जीवन मृत्यु का चक्र तो नेचर का रूल है।
‘171’ का अंक जोड़ने पर 9 मंगल का अंक आता है, जो कि दुर्घटना और अग्नि का मुख्य कारक है। मंगल शक्ति का कारक है। यदि आप अपनी शक्तियों का सदैव सही उपयोग करते है, जन कल्याण से जुड़ते है तो मंगल अच्छा रहता है, बचाव करता है, लेकिन मैने एक बार अपने पुराने लेख में लिखा था कि गुरु अति शुभ ग्रह है, भगवान विष्णु का कारक है और यह अच्छे करने वाले का सदैव भक्ति और सेवा मार्ग वाले व्यक्ति की रक्षा करता है। परंतु कलयुग में आपकी रक्षा सदैव चन्द्र ग्रह करते है, जिनमें मृत्यु से बचाने की क्षमता है भाग्य बदलने की क्षमता है क्योंकि चंद्र भगवान शिव है, विष्णु जग पालक है। वह सदैव नियति के नियमों का पालन करते है और भगवान शिव नियति के ऊपर है। वह ही एक मात्र ऐसे देवता है, जो भाग्य से ऊपर है और नियति को भी बदलने की क्षमता रखते है ।
11 नं०; 2 अंक, जो कि चंद्रमा का अंक है। यह बहुत शुभ माना जाता है। विपत्ति में सदैव रक्षा होती है और ’11 A’ को जोड़े तो 3 अंक आएगा, जो गुरु का अंक, भगवान विष्णु का और 3 अंक भगवान शिव को भी अतिप्रिय है। इसलिए बेल पत्री 3 चढ़ती है। त्रिदेव और त्रिदेवी भी 3 है। बहुत से अर्थ अगर जोड़े जाए तो नेचर से मिलान होता है। न्यूमरोलॉजी की दृष्टि से देखा जाए तो 2 और 3 अंक शुभ है और 1 अंक भी अच्छा अगर उसकी अधिकता न रहे तो। 5 अंक को ग्रोथ का अंक माना जाता है इसलिए लास्ट में मोबाइल न कि संख्या 5 जितना अधिक हो अच्छा माना जाता रहा है।
लेख तो बहुत लंबा लिखा जा सकता है, लेकिन ज्योतिषियों को यह अभी शोध की बहुत आवश्यकता है कि हम किस समस्या में किन ‘Remedy’ का उपयोग करें और किन नियमों का पालन यदि करे तो नियति हमसे खुश रह सकती है और मानव जीवन के लिए उपयोगी होगा इसलिए ‘ज्योतिषी एकता मंच’ सदैव से शोध कार्यालय सम्पूर्ण देश में में खोलने की बात करता है। आप सभी ज्योतिषी समझ सकते है कि ज्योतिष ज्ञान में शोध की आवश्यकता क्यों है। लोग हम ज्योतिषियों पर सवाल क्यों उठाते है कि आप घटना का कारण तो बता देते है पर घटना को रोक क्यों नहीं पाते !
नियति से ऊपर तो हम नहीं है लेकिन नियति के रूल का फॉलो करवा के जरूर हम मानव जीवन को अच्छा बनाने का प्रयास कर सकते है। रावण ने भी अपनी साधना से ग्रहों से वह कार्य करवा लिए थे, जो असंभव थे। इसलिए इस संसार में असंभव कुछ नहीं, बात है तो सिर्फ उसको करने की। असंभव वही है, जो आपको आता नहीं, आने के बाद सरल हो जाता है।
सौजन्य (लेखक) : डॉ पंकज त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष: ज्योतिषी एकता मंच।