गोरखपुर/काठमांडु ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
नेपाल की तबाही ने हिमालय के भविष्य पर खड़े किए बड़े सवाल
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र की आपदा तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे की तेज धारा ने कुछ ही समय में गांवों, सड़कों, पुलों और मानवीय जीवन को भारी नुकसान पहुंचाया।

तबाही के आंकड़े डराने वाले :-
नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में हुई इस आपदा में 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2 हजार से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। वहीं करीब 93 हजार लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत बताई जा रही है।

नेपाल में पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर 4 से 5 अरब डॉलर तक खर्च होने का अनुमान है।
बच्चों पर भी गहरा असर :-
आपदा के बाद हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं। कई स्कूल क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हुए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार करीब 17 हजार बच्चों को तत्काल सहायता की जरूरत है। ऐसे में संकट सिर्फ जान-माल तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी लंबे समय तक असर डाल सकता है।
आखिर कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
प्रारंभिक आकलनों के अनुसार हिमालय के ऊपरी क्षेत्र में बर्फ, हिमनद या चट्टानी हिस्से के खिसकने से बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नदी तंत्र में पहुंचा।इसके बाद एक के बाद एक संकट सामने आते गए।
पहाड़ खिसका, पानी बढ़ा, मलबा आया, बाढ़ आई, सड़कें और पुल टूटे और गांवों का संपर्क कट गया।










