परिवर्तन का दूसरा नाम निषादो के कांशीराम डा. संजय कुमार निषाद” वोट भी नोट भी.
ऐ नौजवान साथियों ये मत भूलो! समाजिक परिवर्तन मतलब किचड़ मे कमल उगाने जैसा है, दूसरे शब्दो मे कहे तो रेगिस्तान मे घास उगाने जैसा, काँटो मे फूल खिलने जैसा, एक बहुत ही मुश्किलों भरा सफर है। किन्तु असंभव नहीं। मैं इस युग को बहुत ही सौभाग्यशाली या भाग्यशाली मानता हूँ कि इस युग मे मेरा जन्म हुआ। जिस प्रकार एक चमार भाई अपने आप को उस समय गौरवान्वित हुए थे जिस समय मान्यवर कांशीराम जी ने जंग छेड़ा था। मान्यवर काशीराम जी ने अपने ब्यान मे लिखा है – “मुझे तो अपने पढ़े लिखे लोगों ने धोखा दिया।” मान्यवर काशीराम जी के ऊपर भी कई दोषारोपड़ हुए थे। किन्तु उन्होंने हार नही मानी। अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। उनके जहन मे अब्राहम लिंकन की एक बात थी जो लोगों को बताया करते थे। कोई भी जंग मनोबल से जीता जाता है। अर्थात् यदि आप के अंदर भावना ही नही रहेगी की मैं राजा बनू या रानी, इंजीनियर बनू की डाक्टर तो क्या आप कभी बन पायेगें?
नौजवान साथियों, बहुत ही कठिन सफर है-“मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है।” आज ठानने की जरूरत है। क्योंकि कठिनाइयों से भरे इस रास्ते मे घर-घर नेता है। समाज के दुश्मनों ने इन घर-घर नेताओं को अपना मानसिक गुलाम बना रखा है। शायद ये भूल गये किसी भी विभाग मे निर्णय लेने के लिए उस विभाग का तजूरबा होना आवश्यक है। दोषारोपड़ करना तो आसान है किन्तु उस रास्ते पर चलना बहुत ही कठिन। तो. जाहिर है जो रास्ते मे ठोकर खाते हुए कामयाबी की ओर चलेगा उसे ही दोषारोपड़ भी झेलना पड़ेगा। अक्सर दोषारोपड़ करने वाले व्यक्ति सफर को आसान समझ बैठते है। जो कभी इन रास्तो पर चले ही ना होते है तो वो भला ठोकर कैसे खा सकते है।
अपने मान सम्मान स्वाभिमान के लिए अपने अगुवा की सुरक्षा करो। भविष्य मे गलती ना हो इसकी गारंटी वही ले सकता है जिसे भविष्य में कुछ काम नहीं करना है।
देश के आजादी के बाद महामना मा. डॉ संजय कुमार निषाद जी के विचारधारा को मानते हुए भारत की राजनीति के अखाड़े में पहली बार कदम रखने वाले मछुआ समुदाय के लोगों इस बात को जानना होगा कि जब तक दलित भाई, यादव भाई दस नेता व झंडे के चक्कर में रहते थे तब तक उनके मां के कोख से हरवाह और चरवाह पैदा होते थे जैसे ही उन्होंने एक झंडा और नेता के नेतृत्व में काम करना शुरू किया तो उनके मां के कोख से हाकीम पैदा होने लगे। इसी प्रकार मछुआ समुदाय को भी अपने कैडर, विचारधारा और नेता पर भरोसा करते हुए एक झंडा और एक नेता मानते हुए पुनः एक बार अपने मां के कोख से हुक्मरान पैदा करना होगा । अतः कैश नहीं कैडर को महत्व देते हुए आगामी 16 अगस्त 2024 को निषाद पार्टी 10 वें स्थापना दिवस प्रादेशिक अधिवेशन में लखनऊ पहुंच कर अपने त्याग व बलिदान को महत्व देते हुए अपनी और अपने आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए तन मन धन का योगदान दें।
जय निषाद राज! ये मत भूलो ये देश हमारा है, हमे हमारा देश चाहिए शासन सत्ता चाहिए।
सोचें, समझें और समझाएं….
कभी महाराजा गुह्यराज निषाद के किले पर मछुआरों की मां के कोख से मालिक और राजा पैदा होते थे। आज भीखारी, लाचार, बेबस, गरीब, बेरोजगार पैदा हो रहे है। कभी चमार भाइयों की मां की कोख से 1992 से पहले हरवाह पैदा होते थे आज बहुजन समाज पार्टी की नेता कुमारी बmहन मायावती, नीला झंडा, नीली टोपी, जय भीम का नारा की देन है कि अब कोख से अधिकारी और हाकिम पैदा हो रहे हैं। कभी यादव भाइयों की मां के कोख से चरवाहा पैदा होते थे आज समाजवादी पार्टी की नेता मुलायम सिंह यादव की देन है उनकी मां के कोख से आज एसडीएम, डीएम, मंत्री, मुख्यमंत्री पैदा हो रहे।






