नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे -बेटिया स्पेशल /मेरठ –
मेरठ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्ची परिभाषा बनकर उभरी है।
जहां अक्सर तलाक के बाद बेटियों को ताने और अकेलापन झेलना पड़ता है, वहीं यहां एक पिता ने अपनी बेटी को टूटने नहीं दिया… बल्कि उसे फिर से मुस्कुराने की वजह दी।
रिटायर्ड जज पिता ने अपनी बेटी की घर वापसी को किसी बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक त्योहार की तरह मनाया।
ढोल-नगाड़ों की गूंज, नाचते-गाते परिवारजन, और मिठाइयों की मिठास— हर पल में सिर्फ एक ही संदेश था… “तुम अकेली नहीं हो।”

बेटी की खुशी को सबसे ऊपर रखा, पिता बोले— “ना एलीमनी ली, ना सामान… बस अपनी बेटी को वापस लाया हूं”

मेरठ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो समाज की सोच को नई दिशा देती नजर आ रही है।




