“कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के मार्गदर्शन में आयोजित अभियान” एम्स गोरखपुर द्वारा कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के प्रेरणादायक मार्गदर्शन में 1 से 3 अगस्त 2025 तक अंगदान जीवन संजीवनी अभियान” के अंतर्गत 15वाँ भारतीय अंगदान दिवस मनाया गया। इस विशेष अवसर पर संस्थान ने आम जनता, मरीजों, विद्यार्थियों और स्टॉफ के बीच अंग […]
“कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के मार्गदर्शन में आयोजित अभियान”

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एम्स गोरखपुर द्वारा कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के प्रेरणादायक मार्गदर्शन में 1 से 3 अगस्त 2025 तक अंगदान जीवन संजीवनी अभियान” के अंतर्गत 15वाँ भारतीय अंगदान दिवस मनाया गया। इस विशेष अवसर पर संस्थान ने आम जनता, मरीजों, विद्यार्थियों और स्टॉफ के बीच अंग और ऊतक दान* के महत्व को उजागर करने हेतु कई जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया।
अभियान के प्रमुख बिंदु:
– 1 अगस्त को स्त्री रोग, मेडिसिन और सर्जरी ओपीडी में डॉ. मनीष कुमार, डॉ. शैलजा शर्मा और डॉ. सौरभ मूर्ति ने जागरूकता व्याख्यान दिए। इन सत्रों में अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए उसके वैज्ञानिक और मानवीय पक्षों को समझाया गया।
– एम्स के विद्यार्थियों द्वारा प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक “एक निर्णय – कई ज़िंदगियाँ” का मंचन किया गया, जिसने यह दर्शाया कि एक अंगदाता कई ज़िंदगियों को बचा सकता है।
– सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा झरना टोला और गोनर में अंगदान शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्थानीय समुदाय के लोगों को प्रेरित किया गया।
– 2 अगस्त को RHTC (ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केन्द्र) में भी अंगदान शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अभियान का समापन: जागरूकता वॉकथॉन
3 अगस्त 2025 को अंगदान :जीवन संजीवनी अभियान के तहत एक भव्य जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया, जो सुबह 7:00 बजे गेट नंबर 1 से शुरू हुआ। इस वॉकथॉन में संस्थान के संकाय सदस्य, छात्र, स्टाफ और स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। सभी ने हाथों में बैनर लिए जनमानस को संदेश दिया कि “अंगदान जीवनदान है।
अंगदान का महत्त्व – क्यों यह जनआंदोलन बनना चाहिए:
भारत में हर वर्ष लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में जान गंवा देते हैं, जबकि अनजाने में हज़ारों स्वस्थ अंग उपयोग नहीं हो पाते। यह स्थिति केवल कम जानकारी, सामाजिक भ्रांतियों और पारिवारिक संकोच के कारण उत्पन्न होती है।
अंगदान का व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है क्योंकि यह:
– गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को नया जीवन देता है,
– लंबी प्रतिक्षा सूचियों को कम करता है,
– समाज में “मरने के बाद भी जीवन देने” की भावना को प्रोत्साहित करता है,
– और देश को एक संवेदनशील व जागरूक राष्ट्र की ओर अग्रसर करता है।
एम्स गोरखपुर के इस प्रयास ने यह सिद्ध किया कि अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है। संस्थान सभी नागरिकों, मीडिया, और नीति-निर्माताओं से आह्वान करता है कि वें अंगदान को जीवनदायिनी परम्परा के रूप में अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।