खजनी/गोरखपुर। सिंचाई विभाग के सरयू नहर खंड प्रथम, गोरखपुर से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ सहायक प्रबुद्ध चंद्र के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों को “सुनियोजित, संदिग्ध और साजिशन […]
खजनी/गोरखपुर। सिंचाई विभाग के सरयू नहर खंड प्रथम, गोरखपुर से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ सहायक प्रबुद्ध चंद्र के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों को “सुनियोजित, संदिग्ध और साजिशन तैयार” माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व और वर्तमान में प्राप्त कई शिकायतों का प्रारूप, भाषा शैली और यहां तक कि संलग्न फोटो भी लगभग एक जैसे पाए गए हैं। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि शिकायतें किसी एक ही स्रोत से तैयार कर बार-बार विभाग को गुमराह करने के उद्देश्य से भेजी जा रही थीं। कई शिकायतों को “द्वेषपूर्ण मानसिकता” से प्रेरित और फर्जी नाम-पते के जरिए भेजा गया बताया जा रहा है।
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धन उगाही के लिए ‘शिकायत तंत्र’ का इस्तेमाल?
सूत्रों का दावा है कि प्रबुद्ध चंद्र द्वारा पैसों के लालच में कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें कराकर दबाव बनाने और धन उगाही की कोशिश की जाती रही। इसके अलावा, बाहरी पत्रकारों और यूट्यूब चैनलों को बुलाकर विभाग से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कराने के भी आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद 23 फरवरी को एक कथित पत्रकार के साथ कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर विभागीय छवि धूमिल करने की भी कोशिश बताई जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि 5 मार्च 2026 को दिए गए स्पष्टीकरण में भी प्रबुद्ध चंद्र द्वारा अपने ही विभाग और उच्चाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसे विभागीय अनुशासन के विपरीत माना जा रहा है।
कर्मचारियों में भय, SC\ST एक्ट तक की धमकी
सूत्रों के अनुसार, कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि संबंधित वरिष्ठ सहायक द्वारा कोर्ट में ले जाने और एससी/एसटी एक्ट लगाने की धमकी दी जाती रही, जिससे कार्यालय में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि प्रबुद्ध चंद्र पहले से ही कई संदिग्ध मामलों में जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर आरोप पत्र तैयार कर जांच भी चल रही है।
FIR और तत्काल ट्रांसफर की सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ राजकीय कार्य में बाधा डालने भ्रामक व झूठी सूचनाएं फैलाने कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने जैसे आरोपों में प्राथमिकी दर्ज करने और तत्काल स्थानांतरण की सिफारिश की गई है। अब फैसला उच्च अधिकारियों के हाथ में पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है और उनसे स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। अब देखना होगा कि इस गंभीर प्रकरण में क्या कार्रवाई होती यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।