आचार्य बालकृष्ण के 55वें जन्मदिवस पर जड़ी-बूटी दिवस मनाया गया, 1600 औषधीय पौधों का हुआ निःशुल्क वितरण
गोरखपुर।
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पतंजलि योगपीठ के सह-संस्थापक एवं प्रबंधक, आयुर्वेद शिरोमणि श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के 55वें जन्मदिवस के अवसर पर मंगलवार को पतंजलि योग परिवार द्वारा जड़ी-बूटी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गोरखपुर के गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा परिसर में औषधीय वनस्पतियों के निःशुल्क वितरण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान पतंजलि योग परिवार के योग साधकों, योग बंधुओं एवं बहनों ने लोगों को औषधीय पौधों की पहचान, उनके उपयोग तथा स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए लगभग 1600 औषधीय पौधों का निःशुल्क वितरण किया। वितरित किए गए पौधों में आम, जामुन, सहजन, अमलतास, अर्जुन, कांचनार, हरसिंगार, नीम, तुलसी, लेमनग्रास, मीठी नीम, अशोक, गुड़मार, मेहंदी, गुर्च, अमरूद, अश्वगंधा, घृतकुमारी, हल्दी, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, बेल, पुनर्नवा, भूमिआंवला, पत्थरचट्टा, अजवाइन सहित अनेक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियां शामिल रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व महापौर डॉ. सत्य पांडेय द्वारा पौधों का वितरण कर किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्यान अधीक्षक पारस जी तथा अजीत कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों ने पौधारोपण एवं औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को औषधीय वनस्पतियों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे इन पौधों को पहचान सकें और उनके महत्व को समझते हुए उनका संरक्षण कर सकें। उन्होंने कहा कि जब समाज वनस्पतियों के लाभों को समझेगा, तब उनका संरक्षण भी सुनिश्चित होगा, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का वनस्पतियों से गहरा संबंध रहा है। आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा भी इन औषधीय पौधों पर आधारित है। आचार्य बालकृष्ण जी द्वारा आयुर्वेद को नए आयाम प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए उपस्थित लोगों ने उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।






