गोला । रामचरितमानस देश के जनजीवन में रचबस गया है। इसका संबंध जनजीवन से दीपक तेल और बाती की तरह है। सगुण ब्रह्म की इतनी नजदीक उपासना कहीं और देखने को नहीं मिलती। यह आम आदमी का जीवन दर्शन है। उक्त बातें कथावाचक प्रीती रामानुजम ने कही। वे गोला क्षेत्र के रामपुर बघौरा में […]
गोला । रामचरितमानस देश के जनजीवन में रचबस गया है। इसका संबंध जनजीवन से दीपक तेल और बाती की तरह है। सगुण ब्रह्म की इतनी नजदीक उपासना कहीं और देखने को नहीं मिलती। यह आम आदमी का जीवन दर्शन है।
उक्त बातें कथावाचक प्रीती रामानुजम ने कही। वे गोला क्षेत्र के रामपुर बघौरा में चल रही रामकथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि राम कथा में प्रभु के आदर्श चरित्र व कृत्य को जानने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसे सुनकर हम अपने जीवन में उनके गुणों को आत्मसात कर सकते हैं। जिससे हमारा जीवन भी मर्यादित हो सके। उन्होंने कहा कि अंधेरे को भगाने के लिए हम दीपक जलाते हैं। दीपक जलाने से अंधेरा दूर होता है और प्रत्येक वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। प्रकाश को बनाए रखने के लिए दीपक की लौ को बरकरार रखना पड़ता है और यह तभी संभव है, जब दीपक में बाती और तेल लगातार बना रहे। इसी तरह जीवन के अंधेरे को दूर करना है, परेशानी से बचते हुए जीवन को सुख शांति और वैभव से आगे बढ़ाना है तथा जीवन को प्रकाशवान बनाए रखना है तो हमें मर्यादा पुरूषोत्तम की तरह आचरण करना होगा और उनके नाम का हर क्षण निरंतरता बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि वेदों में निर्गुण उपासना और सद्गुण उपासना की व्यवस्था दी गई है। इसके अनुसार निर्गुण उपासक निराकार ब्रह्म की आराधना प्रतीकों के आधार पर करता है। जैसे अग्नि और वायु जो दृश्यमान नहीं होते। जिसका कोई आकार नहीं होता। ऐसे निराकार निर्गुण उपासना करने वालों की भी संख्या बहुत है। दूसरी उपासना सद्गुण उपासना है। जिसमें स्वरूप का आधार होता है। जिसे हम देख सकते हैं और उसके रूप गुण की प्रशंसा कर सकते हैं। इस उपासना में श्रीराम कथा को लिया जा सकता है। इस अवसर पर कथा के संयोजक पूर्व ग्राम प्रधान संजय श्रीवास्तव अमित शुक्ल विवेक श्रीवास्तव हनुमान शुक्ल संगम गुप्त सिद्धार्थ शुक्ल आदित्य शुक्ल अमन यादव सहित क्षेत्र के श्रोतागण उपस्थित होकर कथा का रसपान किया।
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