नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-
CBI जांच में Chemistry और Biology के प्रश्नों के कथित लीक का स्रोत सामने आने का दावा; NTA से जुड़े विशेषज्ञों और अन्य आरोपियों पर कार्रवाई

नई दिल्ली। NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच अब बेहद गंभीर चरण में पहुंच चुकी है। भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार CBI ने 12 मई 2026 को इस मामले में FIR दर्ज कर व्यापक जांच शुरू की थी। शिकायत शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मिली थी।
🔴 3 मई को हुई थी NEET-UG 2026 परीक्षा

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National Testing Agency यानी NTA ने 3 मई 2026 को NEET-UG 2026 परीक्षा आयोजित की थी। सरकार को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से संबंधित कुछ दस्तावेजों के अनधिकृत प्रसार की शिकायत मिली, जिसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई।
🚨 12 मई: CBI ने दर्ज की FIR
12 मई 2026 को CBI ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया।

CBI ने मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और साक्ष्य नष्ट करने सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण कानून और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के प्रावधान भी लगाए गए।
CBI का लक्ष्य साफ था—
पेपर लीक का वास्तविक स्रोत कौन था?
प्रश्न किस तरह बाहर पहुंचे?
और किन लोगों ने इसका फायदा उठाया?
🧪 Chemistry पेपर: CBI ने P.V. Kulkarni को स्रोत बताया
CBI की आधिकारिक जानकारी के अनुसार P.V. Kulkarni, जो NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े Chemistry Lecturer थे, के पास प्रश्नपत्र तक पहुंच थी।
CBI का आरोप है कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में उन्होंने कुछ छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं और प्रश्नों के साथ विकल्प तथा सही उत्तर बताए।
CBI के अनुसार छात्रों ने इन प्रश्नों को अपनी नोटबुक में लिखा और बाद में इनका NEET-UG 2026 के वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलान हुआ।
यानी जांच एजेंसी के मुताबिक कथित लीक की कड़ी परीक्षा से पहले ही शुरू हो चुकी थी।
🧬 Biology पेपर में भी सामने आई कथित गड़बड़ी
16 मई 2026 की भारत सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति में CBI ने मनीषा गुरुनाथ मंधारे की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
CBI के मुताबिक वह Pune की Senior Botany Teacher थीं और NTA की ओर से NEET-UG 2026 की Expert नियुक्त थीं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्हें Botany और Zoology के प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी।
CBI के अनुसार अप्रैल 2026 में कथित तौर पर छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित की गईं, जहां Botany और Zoology के कई प्रश्न बताए और समझाए गए। छात्रों को उन्हें नोटबुक में लिखने और संबंधित प्रश्नों को किताबों में चिन्हित करने के लिए कहा गया।
CBI के अनुसार इन प्रश्नों में से अधिकांश वास्तविक NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।
💰 लाखों रुपये लेकर छात्रों को प्रश्न बताए जाने का आरोप
CBI की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक जांच में ऐसे बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने छात्रों को कथित तौर पर इन विशेष कोचिंग कक्षाओं तक पहुंचाया।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कुछ छात्रों ने इन कक्षाओं में शामिल होने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था।
👤 18 मई तक 10 आरोपी गिरफ्तार
CBI की 18 मई की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस मामले में उस समय तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
गिरफ्तारियां दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर सहित विभिन्न स्थानों से की गई थीं।
CBI ने इस दौरान कई स्थानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री जब्त की और उनके विश्लेषण की प्रक्रिया शुरू की।
🔎 जांच का दायरा कितना बड़ा था?
CBI ने मामले की जांच के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष टीमें तैनात कीं।
सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जांच के दौरान कई स्थानों पर तलाशी, संदिग्धों से पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की गई।
CBI का कहना है कि जांच का उद्देश्य पेपर लीक के स्रोत से लेकर उससे जुड़े बिचौलियों और लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों तक पूरी कड़ी का पता लगाना है।
❓ अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अगर प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाले लोगों के माध्यम से सवाल बाहर पहुंचे, तो परीक्षा की गोपनीय व्यवस्था में चूक कहां हुई?
क्या केवल कुछ व्यक्तियों ने परीक्षा की गोपनीयता तोड़ी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था?

कितने छात्रों तक कथित तौर पर प्रश्न पहुंचे और इसका परीक्षा परिणाम पर कितना असर पड़ा?
इन सभी सवालों का अंतिम उत्तर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
⚖️ निष्पक्ष टुडे की विशेष टिप्पणी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि CBI की जांच में लगाए गए आरोप और अदालत में दोष सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं।
इसलिए निष्पक्ष टुडे इस खबर को आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत करता है।
कानूनी रूप से अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय के बाद ही मानी जाएगी।




