वक़्फ़ (संशोधन ) विधेयक:२०२५ पर उपजे भ्रांतियों को स्पष्ट करने संबंधित विषयक संगोष्ठी पर मुस्लिम समुदाय एवं मदरसा के छात्रों के साथ उपरोक्त विषय पर जागरूकता एवं परिचर्चा में भाग लेते हुए सैयद इज़हार, प्रबंधक, मदरसा एम० न० के० ने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका इतिहास हदीसों से जुड़ा हुआ है। आजकल […]
वक़्फ़ (संशोधन ) विधेयक:२०२५ पर उपजे भ्रांतियों को स्पष्ट करने संबंधित विषयक संगोष्ठी पर मुस्लिम समुदाय एवं मदरसा के छात्रों के साथ उपरोक्त विषय पर जागरूकता एवं परिचर्चा में भाग लेते हुए सैयद इज़हार, प्रबंधक, मदरसा एम० न० के० ने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका इतिहास हदीसों से जुड़ा हुआ है। आजकल जिस अर्थ में इसका प्रयोग किया जाता है, उसका मतलब है अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान या पवित्र धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान। उन्होंने कहा कि वक्फ का समकालीन अर्थ इस्लाम के दूसरे खलीफा श्री ओमर के समय में अस्तित्व में आया था। आज की भाषा में वक्फ एक प्रकार का Charitable Endowment है, जहां कोई व्यक्ति धार्मिक या सामाजिक भलाई के लिए संपत्ति दान करता है। इसमें दान निजी चीज का ही किया जा सकता है। सरकारी संपत्ति या किसी और की संपत्ति का दान नहीं कर सकते।उन्होंने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड में धार्मिक दान से जुड़े कार्यों में किसी गैर-इस्लामिक सदस्य को जगह नहीं मिलेगी एवं धार्मिक संस्थाओं के संचालन में गैर-मुस्लिम व्यक्ति रखने का प्रावधान नहीं है।
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आगे बताया कि कुछ राजनैतिक दल अपने स्वार्थवश भ्रांति फैला रहें है कि यह विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक क्रियाकलापों और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में दखल के लिए लाया जा रहा और अल्पसंख्यक समुदाय को डरा कर अपनी वोट बैंक खड़ी करने की कोशिश कर रहा है।
आगे बताया कि वक्फ बोर्ड या इसके परिसरों में जिन गैर – मुस्लिम सदस्यों को रखा जाएगा, उनका काम धार्मिक क्रियाकलापों से संबंधित नहीं होगा। वे सिर्फ यह सुनिश्चित करेंगे कि दान से संबंधित मामलों का प्रशासन नियम के अनुरूप हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि वक्फ भारत में ट्रस्ट की तरह है। ट्रस्ट में ट्रस्टी और एक मैनेजिंग ट्रस्टी होते हैं। वक्फ में वाकिफ और मुतवल्ली होते हैं, जो इस्लाम के अनुयायी होते हैं। श्री इज़हार ने कहा कि वक्फ शब्द ही इस्लाम से आया है, इसलिए वक्फ वहीं कर सकता है, जो इस्लाम का अनुयायी हो। उन्होंने कहा कि वक्फ धार्मिक चीज है, लेकिन वक्फ बोर्ड या वक्फ परिसर धार्मिक नहीं हैं। कानून के मुताबिक चैरिटी कमिश्नर किसी भी धर्म का व्यक्ति बन सकता है, क्योंकि उसे ट्रस्ट नहीं चलाना, उसे यह सुनिश्चित करना है कि चैरिटी कानून के हिसाब से बोर्ड का संचालन हो।मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलाप और उनके बनाए हुए दान से जुड़े ट्रस्ट यानि वक्फ में अब सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती। मुतवल्ली, वाकिफ, वक्फ सब उनके ही होंगे, परन्तु यह जरूर देखा जाएगा कि वक्फ की संपत्ति का रख-रखाव ठीक से हो रहा है या नहीं। वक्फ का संचालन कानूनसे हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि “सैकड़ों साल पहले किसी बादशाह की दान की गई संपत्ति को 12 हजार रुपए के मासिक किराये पर पांच सितारा होटल बनाने के लिए देना कहाँ उचित है ? अब वह पैसा गरीब मुसलमानों, तलाकशुदा महिलाओं, अनाथ बच्चों, बेरोजगार मुसलमानों के भलाई और उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ के पास लाखों करोड़ों रुपए की भूमि है, लेकिन आय सिर्फ 126 करोड़ रुपए है।
आगे चर्चा करते हुए बताया कि यह विधेयक ज़मीन की सुरक्षा प्रदान करेगा, किसी की ज़मीन घोषण मात्र से वक़्फ़ नहीं बनेगी और उसे सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ज़मीन को सुरक्षा देंगे और शेड्यूल 5 और 6 के अनुसार आदिवासियों की ज़मीन सुरक्षित हो जाएगी।
इसके साथ उन्होंने कहा कि हमारे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भय पैदा करना का फैशन बन गया है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर, ट्रिपल तलाक़ और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समय भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन मुस्लिम समुदाय भी जानता है कि भय की कोई बात नहीं थी, उन्होंने कहा कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु कहता था कि CAA से मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी लेकिन दो साल हो गए किसी की नागरिकता नहीं गई है। अब इस देश के किसी भी नागरिक पर, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, कोई आँच नहीं आएगी।